
काश्विक ने जब आँखें खोलीं, तो पाया कि पूरा कमरा खाली था। पल भर में उसे याद आया—वह देवियानो के साथ थी।
वह घबराकर अपना सिर पकड़ लेती है; तेज़ दर्द से उसका सिर फटा जा रहा था। धीरे-धीरे वह अपने पैर नीचे करती है, तभी उसकी नज़र अपनी ड्रेस पर पड़ती है—जो फटी हुई थी।





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