
संवि ने खाना बना लिया, तो अंबिका जी ने उसे विहान को बुलाने के लिए ऊपर भेजा। संवि जब कमरे में पहुँची, तो उसका पारा सातवें आसमान पर था। उसने विहान से एक शब्द भी नहीं कहा और बस गुस्से भरे चेहरे के साथ नीचे चलने का इशारा किया।
विहान ने पास ही रखा एक सुंदर सा फूल उठाया, जो उसने संवि के लिए मंगाया था। उसने हाथ बढ़ाते हुए धीरे से कहा, "सॉरी संवि... मुझे माफ़ कर दो। मेरी वजह से तुम्हें सबके सामने शर्मिंदा होना पड़ा।"





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