
एक महीने बाद, संवि किचन में विहान की पसंद का खाना बना रही थी। वह उसे एक प्यारा सा सरप्राइज देना चाहती थी। तभी घर की घंटी बजी। संवि एक्साइटमेंट में दौड़ी, यह सोचते हुए कि विहान आ गया है। उसने जैसे ही गेट खोला, उसके सामने विहान नहीं, बल्कि लीसा खड़ी थी।
संवि हैरान होकर बोली, "लीसा! तुम यहाँ?" लीसा ने मुस्कुराते हुए बताया कि उसका ग्रेजुएशन एग्जाम का सेंटर पटना गया है। संवि ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया। किचन से आ रही आलू के पराठों की खुशबू ने लीसा को ललचा दिया। डाइनिंग टेबल पर बैठते ही उसने पराठों की जमकर तारीफ की।





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